KIIT Institution of Eminence

सेवा संस्था की गतिविधियाँ

ओडिशा में व्यावसायिक शिक्षा की दयनीय हालात के परिणामस्वरूप, दक्षिणी राज्यों में व्यावसायिक शिक्षा में प्रवेश हेतु छात्रों के बड़े पैमाने पर पलायन ने, 1992-93 में किराए के गेराज में, कलिंग इंस्टिट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (के.आई.आई.टी. – जिसका आधार वर्ष 1997 है) की शुरुआत हुई। अब ‘इंस्टिट्यूट ऑफ एमिनेंस’ टैग के साथ यह एक विशाल बहु-अनुशासनात्मक अत्याधुनिक विश्वविद्यालय बन गया है। के.आई.आई.टी. अब इंजीनियरिंग, मेडिकल व डेंटल स्टडीज, न्यायशास्त्र, प्रबंधन,  नर्सिंग,  जैव प्रौद्योगिकी, फिल्म और मीडिया, मानविकी आदि की विभिन्न शाखाओं में शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करने वाली संस्थाओं का एक समूह है। राधाकृष्णन आयोग की सिफारिशों की तर्ज पर, के.आई.आई.टी. नए आदर्शों, गरीबों के प्रति सहानुभूति, और महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रेम और शांति के लिए उत्साहित कर रहा है। के.आई.आई.टी. ने विशेष रूप से गरीब आदिवासी बच्चों के लिए उसी वर्ष एक अन्य संस्था कलिंग इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज (के.आई.एस.एस.) की शुरुआत की जो अब 60,000 जनजातीय छात्रों (KISS भुवनेश्वर में 30000 छात्रों, 20000 पूर्व छात्र, और ओडिशा के 10 जिलों में उपग्रह केंद्रों में 10000 छात्र) के साथ दुनिया की सबसे बड़ी आवासीय आदिवासी संस्था बन गई है। KISS में बच्चों को भोजन, आवास, स्वास्थ्य सेवा और किंडरगार्टन से स्नातकोत्तर की शिक्षा बिल्कुल निशुल्क प्रदान की जाती है जिसमें Ph. D भी शामिल है। 2017 में इसे विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया और यह दुनिया का पहला जन-जातीय विश्वविद्यालय बना।

कलिंग इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज (के.आई.एस.एस.)

ओडिशा केवल गरीब और हर वैकल्पिक वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित ही नहीं होता अपितु ओडिशा  में आदिवासी हैं जो कुल आबादी का एक चौथाई हिस्सा हैं। अपने लिए उपलब्ध जंगलों में बुनियादी सुविधाओं के बिना एकांत में रहते हैं। विशेष रूप से वे शिक्षा, अच्छे स्वास्थ्य और अन्य चीजों के बारे में नहीं जानते हैं। यही वजह है कि वे गरीबी और भुखमरी में रहते हैं , जो कुपोषण और अशिक्षा का कारण हैं। शुरुआत से ही के.आई.आई.टी. की तरफ़ से के.आई.एस.एस. के रूप में यह योगदान जनजातीय समुदाय के लिए एक महान उपहार है।  KISS जिसकी स्थापना 125 गरीब आदिवासी बच्चों के साथ हुई आज वह पूर्ण निशुल्क और पूर्ण आवासीय संस्था 60,000 से भी अधिक आदिवासी छात्रों (KISS भुवनेश्वर में 30000 छात्रों, 20000 पूर्व छात्र, और ओडिशा के 10 जिलों में उपग्रह केंद्रों में 10000 छात्र) का घर है। इसे भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा मानद विश्वविद्यालय का दर्जा भी दिया गया है, और विशेष रूप से आदिवासी बच्चों के लिए पूरी तरह से मुफ़्त और पूरी तरह से आवासीय होने के साथ इसे दुनिया में पहला जनजातीय विश्वविद्यालय होने का गौरव भी प्राप्त है। KISS ने अपने गुणवत्ता काम की वजह से सभी संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और सभी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ अनुबंध किया है।यह KIIT के सभी हित-धारकों, KIIT के शुभचिंतकों और  इसके संस्थापक प्रो अच्युता सामंता, द्वारा विकसित एक बहुत अच्छे वित्तीय मॉडल के मदद से चल रहा है,  जो न केवल किराए पर एक साधारण जीवन व्यतीत करते हैं, KISS के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है  यही कारण है कि यह सब संभव हो पाया है।

परिधि विकास

हालाँकि बड़े पैमाने पर समाज में KIIT के योगदान को निर्धारित नहीं किया जा सकता है, फिर भी KIIT ने समाज के हर पहलू को प्रभावित किया है। शहर के बाहरी इलाके में के.आई.आई.टी. के आने से क्षेत्र में जबरदस्त व्यावसायिक और सामाजिक विकास हुआ है। 1993 में जिस भूमि की कीमत 30,000 रुपये प्रति एकड़ थी आज वह 20 करोड़ रुपये प्रति एकड़ है। अब यहाँ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, रिहायशी मकान, होटल, रेस्त्रां आ गए हैं जिनमें हजारों लोग काम कर रहे हैं और तो और राज्य के लिए भारी राजस्व भी कमा रहे हैं। बेकार व बेरोजगार युवाओं को अकसर अपराधों के लिए लालच दिया जाता है वे भी अब क्षेत्र के विकास के लिए आगे आएं हैं। KIIT ने 500 स्थानीय युवाओं को कर्मचारियों के रूप में नियुक्त किया है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में कई शैक्षणिक संस्थान भी आए हैं। व्यावसायिक गतिविधियों के साथ क्षेत्र में अब हजारों लोग सीधे तौर पर कार्यरत हैं जबकि के.आई.आई.टी. ने 10000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार दिया है और 2, 00,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। जिसके परिणामस्वरूप निम्नलिखित योगदान हुए हैं।

  • व्यावसायिक गतिविधियाँ बढ़ गईं
  • नए शैक्षणिक संस्थानों कि शुरुआत हुई है
  • विशाल रोजगार सृजित करना
  • क्षेत्र में अपराध दर में कमी
  • भूमि की कीमतें और इन्फ्रास्ट्रक्चर लागत कई गुना बढ़ी है
  • एक समय सुनसान और वीरान दिखने वाला भुबनेश्वर का सरहदी इलाका अब भुवनेश्वर शहर के भीतर एक शहर बन गया है

कौशल विकास और उद्यमिता

विश्वविद्यालय के रूप में कौशल विकास और उद्यमिता को प्रोत्साहन KIIT का अभिन्न अंग रहा है। अपने स्वयं के प्रशिक्षण के अलावा और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के माध्यम से, के.आई.आई.टी. ने विभिन्न ट्रेडों में आई.टी.आई और पॉलिटेक्निक के लिए प्रमाण पत्र देने के बाद 1992 से 50,000 से अधिक कुशल व्यक्तियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया है। इसके अलावा के.आई.आई.टी. डीडीयू-जीकेवाई और भारत सरकार / ओडिशा सरकार की कई अन्य योजनाओं के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में रोजगार के साथ हर साल 5000 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण भी दे रहा है। जनवरी 2020 के महीने में कंधमाल संसदीय क्षेत्र में एक अनुकरणीय ‘नौकरी मेला’ आयोजित किया गया था। अस्सी कंपनियों ने कंधमाल में आकर कक्षा 5 वीं – 10 वीं कक्षा की योग्यता के साथ ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को 7000 नौकरियों की पेशकश की।

उद्यमी बनाना

अपने संस्थापक, प्रो. अच्युत सामंत के नेतृत्व में, KIIT ने 100 उद्यमियों को तैयार किया है। वे अपने करियर में सफल रहे हैं। इसके अलावा, 100 उद्यमी आज तक के.आई.आई.टी. टीबीआई (टेक्नोलॉजी बिजनेस इन्क्यूबेटर) से निकले हैं।

अंतर्राष्ट्रीयकरण

के.आई.आई.टी. एक दशक पहले ओडिशा में, देश में और उसके पड़ोसी राज्यों में ज्यादा दृश्यता के बिना स्थापित किया गया है। भुबनेश्वर में कोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी नहीं है। उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण में के.आई.आई.टी. बहुत लोकप्रिय रहा है। न केवल के.आई.आई.टी. ने भारत और विदेशों में 170 से अधिक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, बल्कि इसने शिक्षा सम्बन्धी सभी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों की सदस्यता भी हासिल कर ली है। के.आई.आई.टी. इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज (IAU) से प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीयकरण रणनीतियाँ सलाहकार सेवा (ISAS) बैज मिला है। छात्रों को आकर्षित करने के संबंध में, इसकी उपलब्धि अद्वितीय है। हालांकि KIIT भुवनेश्वर, ओडिशा में स्थित है, लेकिन वर्तमान में इसके पास अभी भी 53 देशों के 1000 विदेशी छात्र हैं, जबकि 2000 से अधिक छात्र स्नातक कर चुके हैं। विदेशी छात्रों के लिए कई अल्पकालिक पाठ्यक्रम होने के अलावा, KIIT पूरे साल कई अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, और सम्मेलनों का आयोजन करता रहा है, जैसे कि मानव विज्ञान विश्व कांग्रेस और कवियों की विश्व कांग्रेस जिसने 83 देशों से प्रतिभागियों को आकर्षित किया है प्रमुख हैं।

खेल-कूद

यह महसूस करते हुए कि शिक्षा और खेल एक दूसरे के पूरक हैं, KIIT की स्थापना से हम खेलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते रहे हैं। नतीजतन, 32 खेल आयोजनों के लिए विशाल खेल अवसंरचना का निर्माण किया गया है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय मानक स्विमिंग पूल, तीरंदाजी मैदान, रग्बी मैदान, फुटबॉल ग्राउंड, हॉकी ग्राउंड, बीसीसीआई द्वारा स्वीकृत क्रिकेट ग्राउंड, और कई अन्य शामिल हैं। और जिस तरह से KIIT ने दो महीने के नोटिस पर अखिल भारतीय वनों के रजत जयंती खेल समारोह के बाद पहली बार KIIT परिसर में Khelo India University गेम्स का सफलतापूर्वक आयोजन किया यह बात साबित हो चुकी है।

के.आई.आई.टी. और के.आई.एस.एस. 5000 खेल कर्मियों (छात्रों) बनाने में सक्षम हुआ है जो अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्य और  विश्वविद्यालय स्तर पर खेल रहे हैं। KIIT भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जिसने देश को ओलंपियन दिया है और साथ ही देश को पहली बार विश्व विश्वविद्यालय खेलों में स्वर्ण पदक दिलाया है, इसके छात्र आज एशियाड, कॉमनवेल्थ खेल व  अन्य सभी अंतर्राष्ट्रीय खेल और एथलेटिक प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं। जिस तरह की खेल अवसंरचना का निर्माण के.आई.आई.टी. ने अपने यहाँ किया है वैसा कहीं और देखने को नहीं मिलता।

पर्यटन

अपनी स्थापना के बाद से (1997 आधार वर्ष है), के.आई.आई.टी. भारत और विदेश के हजारों विद्वानों को भुवनेश्वर आमंत्रित कर के सैकड़ों राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार, कार्यशाला, सम्मेलन आयोजित करता रहा है। इसके अलावा, के.आई.आई.टी. विश्वविद्यालय और के.आई.आई.टी. ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के 30,000 छात्रों में से 95% छात्र भारत के कोने- कोने से आते हैं और बाकी 53 विदेशी देशों से आते हैं। ये सभी चीजें राज्य के पर्यटन के क्षेत्र में बहुत योगदान देती हैं और हम हवाई अड्डे के प्राधिकरण और होटलों की टिप्पणी को अच्छी तरह से उचित ठहरा सकते हैं कि प्रत्येक उड़ान में, केवल के.आई.आई.टी. के कारण 20% सीटें आरक्षित होती हैं, और होटलों का भी ऐसा ही कहना है।

उद्यमी बनाना

ग्रामीण विकास के मामले में, शुरुआत से ही KIIT का जबरदस्त योगदान है। आप को यह जानकार ख़ुशी और आश्चर्य होगा कि वर्ष 2000 जब KIIT केवल तीन वर्ष (1997 – 2000) का था KIIT ने एक सबसे दूरस्थ गाँव को एक आदर्श गाँव और फिर एक स्मार्ट गाँव में परिवर्तित करना शुरू कर दिया था । गांव का नाम कलराबंक है, जो कटक जिले में स्थित है और भुवनेश्वर से 60 KM दूर है। इस गाँव में उस क्षेत्र के लोगों के लिए कोई सुविधा नहीं थी। लेकिन अब कलराबंक गांव को देश के एकमात्र स्मार्ट गांव के रूप में प्रमाणित किया गया है और संपूर्ण पंचायत (गांवों का समूह) को आदर्श पंचायत के रूप में विकसित किया गया है। इस गाँव और पंचायत में शहर की सुविधाएँ बनाई गई हैं और इसलिए यह एक शहर जैसा दिख रहा है। इन सुविधाओं में हाई स्कूल (आवासीय), लॉकर एंड एटीएम के साथ राष्ट्रीयकृत बैंक, पुलिस स्टेशन, डाकघर, स्थानीय आवासीय विद्यालय (कलिंगा इंग्लिश मीडियम स्कूल), टेली मेडिसिन फैसिलिटी के साथ ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, पब्लिक लाइब्रेरी, पब्लिक पार्क, चिल्ड्रन पार्क शामिल हैं। , पेयजल परियोजना, पक्की सड़क, स्ट्रीट लाइट, नागरिक ज्ञान और सेवा केंद्र, आदि।

स्वास्थ्य-सेवा

जैसा कि सही कहा गया है कि स्वास्थ्य धन है, इसलिए स्वास्थ्य देखभाल हर समाज और समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 2500 बेड वाले मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के साथ KIIT में विशाल मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज भी है। के.आई.आई.टी. राज्य में गरीब लोगों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र की दिशा में बहुत योगदान दे रहा है। विश्वविद्यालय मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज और अस्पताल को आसपास रहने वाले समुदायों के लिए बतौर मेडिकल सेंटर विकसित किया गया था। जिस तरह 2500 बिस्तर वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल 2000 मरीजों को रोज मुफ्त ओपीडी उपचार की व्यवस्था के साथ चौबीस घंटे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है एक गौरव की बात है। इस मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल ने लगभग 850 इनडोर रोगियों के लिए उपचार, आहार, सफाई और हाउसकीपिंग खर्च की दिशा में केवल प्रति दिन रु 100 का भुगतान करने का प्रावधान किया है। इसके अलावा अन्य सभी सेवाओं पर दस प्रतिशत की छूट भी दी गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए, KIIT ने 25 बेड का चिकित्सा केंद्र और ग्रामीण औषधालय स्थापित किया हैं इसके अतिरिक्त KISS के छात्रों के लिए 100 बेड का शहरी औषधालय भी बनाया है। KIIT नियमित रूप से पिछड़े जिलों जैसे कंधमाला, बौध, नयागढ़ और गंजम के 20 ब्लॉकों में हर महीने के प्रत्येक तीसरे रविवार को स्वास्थ्य शिविर आयोजित करता है। इसके अलावा, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कुपोषण, भूख, गरीबी और पर्यावरण संरक्षण जैसे विभिन्न मुद्दों पर जागरूकता के लिए हेल्थकेयर अवेयरनेस प्रोग्राम आयोजित किए जाते हैं। इतना ही नहीं बल्कि 25 बिस्तरों वाले सौ ग्रामीण अस्पतालों की स्थापना के माध्यम से ओडिशा को रोग मुक्त बनाने की योजना है भी है।

कोविड 19

कोरोना महामारी के दौरान, KIIT ने अपने कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (KIMS) परिसर में 500 बिस्तर वाला COVID-19 अस्पताल विकसित किया है इसके अलावा 200 से अधिक बेड वाले तीन COVID-19 अस्पताल कंधमाल, बोलनगीर और मयूरभंज जिले में KIMS द्वारा आवश्यक सुविधाओं और मेडिकल स्टाफ के साथ चलाये जा रहे हैं।

सभी की मदद

ओडिशा में और ओडिशा से परे भी यह चलन रहा है कि कोई भी हो और किसी भी प्रकार के संकट में हो तो सबसे पहले के.आई.आई.टी. ने उसकी तरफ़ मदद का हाथ बढ़ाया है। इसमें गरीब महिलाएं, गरीब लड़कियां, गरीब लड़के शामिल हैं, फिर चाहे बात उनके स्वास्थ्य की हो, शिक्षा की हो या सवाल उनकी आजीविका का हो। वर्तमान COVID-19 संकट में KIIT लगातार पहले  दिन से ही सामाजिक कार्य कर रहा है। सामुदायिक विकास के विभिन्न सामाजिक कार्य जो इस दौरान KIIT ने किये वे इस प्रकार हैं:

  1. कोविद -19 संकट के समय सामुदायिक कार्य: कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (KIMS), एक मेडिकल कॉलेज है, जिसमें 2500 बेड वाला मल्टी-स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल हैं, जो KIIT का एक घटक है, ओडिशा राज्य सरकार के निर्देश पर, KIIT ने 50-बेड वाले आईसीयू के साथ 500-बेड वाला COVID-19 अस्पताल विकसित किया है और COVID-19 से उत्पन्न किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तथा तैयारियों को बढ़ाने के लिए अपने परिसर में 500 बिस्तर वाला बैक-अप अस्पताल बनाया है।
  2. इसी तरह राज्य सरकार के एक इशारे पर, हमने मयूरभंज, बलांगीर और कंधमाल आदिवासी जिले के KISS परिसरों को 200 बिस्तरों वाले सामान्य बैक-अप अस्पतालों के साथ 200-बेड वाले COVID-19 अस्पतालों में विकसित किया है।
  3. जबकि कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (KIMS) इन सभी अस्पतालों को चलाएगा और आवश्यक मानव शक्ति और बुनियादी ढांचा प्रदान करेगा, राज्य सरकार ने आवर्ती व्यय और परिचालन लागत को पूरा करने के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है।
  4. भुवनेश्वर शहर में और उसके आसपास (हर रविवार) प्रति दिन लगभग 40,000 जरूरतमंद और गरीब परिवारों को अपने संसाधनों से भोजन के पैकेट वितरित करना, जिससे झुग्गी क्षेत्रों में रहने वाले बढ़ते बच्चों को पर्याप्त पोषण और प्रोटीन मिलेगा। यह पहल 21 दिनों के लॉकडाउन अवधि तक जारी रहेगी। इसके अलावा, संबंधित विभाग से उचित अनुमति के साथ सात दिनों के लिए भुवनेश्वर शहर में काम करने वाले लगभग 1200 पुलिस कर्मियों को दोपहर के भोजन के पैकेट प्रदान किए जा रहे हैं।
  5. भुवनेश्वर के विभिन्न हिस्सों में सभी आवारा जानवरों (कुत्तों और गायों) को पकाया हुआ भोजन प्रदान करना और हजारों बंदरों को हरी सब्जियों देना।

असाधारण इंसान की अविश्वसनीय कहानी

के.आई.आई.टी., इसके जन्म, इसकी वृद्धि और इसकी उत्कृष्टता से संबंधित तथ्यों की एक करीबी जांच एक साधारण मनुष्य द्वारा प्राप्त असाधारण कारनामों की अविश्वसनीय कहानी की ओर ले जाती है। किसी ने कभी भी यह कल्पना नहीं की होगी कि एक बालक जिसने 4 वर्ष कि अल्प आयु में अपने पिता को खो दिया हो, जिसे उसकी माँ ने अत्यंत निर्धनता में बड़ा किया हो, वह KIIT और KISS जैसा अविश्वसनीय कुछ बना सकता है। छोटा सा मुफ़स्सिल लड़का जिसके पास केवल दो खूबियाँ थीं, साहस और ईमानदारी, जो कि उसे उसकी माँ से विरासत में मिली थीं, उसने कैसे अपनी सभी प्रतिकूलताओं को अनुकूलताओं में बदल कर अपनी एक पहचान अच्युत सामंता के रूप में बनाई और ओडिशा राज्य को KIIT के जरिये एक पहचान दिलाने में कामयाबी पायी। इंसान को KISS जैसा संस्थान बनाने के लिए उनके जैसा गरीब और संवेदनशील होना चाहिए तथा विपत्तियों से लड़ कर KIIT जैसा कुछ बनाने के लिए ईमानदार और साहसी। अच्युता सामंत की संवेदनशीलता, साहस, दूरदर्शिता और दृढ़ निश्चय के.आई.आई.टी. में परिलक्षित होते हैं, जिसकी शुरुआत महज एक अविश्वसनीय राशि से हुई थी रु. 5000 (100 USD) से हुई थी, जिसने आज दुनिया के विश्वास को मजबूत किया है कि सत्य निश्चित रूप से कल्पना से अधिक मजबूत है।

प्रारंभ में के.आई.आई.टी. ने 5 वीं कक्षा से 10 वीं कक्षा तक शैक्षणिक योग्यता के साथ 7000 बेरोजगार ग्रामीण युवाओं को 80 कंपनियों के माध्यम से रोजगार देने की पहल की है और पूरे कंधमाल और इसके परिधि जिलों से 15000 ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का कार्य किया है।

KIIT कम्युनिटी इंगेजमेंट सेल (CEC): शुरुआत में के.आई.आई.टी. ने सबसे बड़ा गरीब जिला CEC के लिए चुना जिसमें 75% आबादी ST और SC की है।

KIIT ने CEC के तहत अभिनव पहल करते हुए आकांक्षात्मक जिले, कंधमाल के कुछ हिस्सों को विकसित करने के लिए चुना है और 12 प्रखंडों से 12 पंचायत चिह्नित किये गए हैं ताकि इन इलाके को उनमें रहने वाले लोगों के दैनिक जीवन के लिए थोड़ा और अधिक रहने योग्य और आरामदायक बनाया जा सके और रोजगार के अवसर भी पैदा हों, के.आई.आई.टी. अब इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।

के.आई.आई.टी. वास्तव में सार्वजनिक सेवा में लगा एक निजी विश्वविद्यालय है, जो कि अन्य विश्वविद्यालयों से भिन्न है। सचमुच और निश्चित रूप से, यह एक मानवतावादी करुणामयी विश्वविद्यालय है। KIIT अपनी स्थापना के बाद से ही एक समाज से जुड़ा विश्वविद्यालय है। इसके संस्थापक का मानना है कि यदि विश्वविद्यालय अपने सामाजिक उत्तर्दाइत्व का पालन नहीं करेगा तो केवल छात्रों को पढ़ाने और प्रमाण पत्र देने के लिए विश्वविद्यालय का कोई मूल्य नहीं है। जैसा कि इसके संस्थापक में समाज और गरीब लोगों के लिए जबरदस्त उत्साह है, जो कि विश्वविद्यालय के बाकी सभी कर्मचारियों में आ गया है और  यही कारण है कि आने वाले वर्षों में के.आई.आई.टी. के माध्यम से, इस प्रकार के सामुदायिक विकास कार्य पिछले वर्षों की तुलना में बहुत अधिक होंगे। KIIT को इस नेक काम को आगे बढ़ाने के लिए आप सभी की शुभकामनाओं और आशीर्वाद की जरूरत है।